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परसा में मोहर्रम को लेकर प्रशासन अलर्ट, ताजिया जुलूस के लिए लाइसेंस अनिवार्य; शांति बनाए रखने की अपील

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सारण जिले के परसा में मोहर्रम पर्व को लेकर शांति समिति की बैठक आयोजित हुई। प्रशासन ने ताजिया जुलूस के लिए लाइसेंस अनिवार्य बताया और लोगों से आपसी भाईचारे के साथ पर्व मनाने की अपील की।

परसा/सारण/आलम की खबर:मोहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने को लेकर सारण जिले के परसा थाना क्षेत्र में प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में सोमवार को मारर दरगाह स्थित उर्दू प्राथमिक विद्यालय परिसर में शांति समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और स्थानीय ग्रामीणों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य पर्व के दौरान आपसी भाईचारा बनाए रखना और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन एवं आम लोगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था।

बैठक की अध्यक्षता अंचलाधिकारी अनुज कुमार ने की। उन्होंने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि मोहर्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक एकता और आपसी सहयोग का भी प्रतीक है। उन्होंने सभी समुदायों के लोगों से अपील की कि पर्व को शांतिपूर्ण तरीके से मनाएं और क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही सामाजिक सद्भाव की परंपरा को मजबूत बनाए रखें।

सीओ ने कहा कि किसी भी पर्व या आयोजन को सफल बनाने में प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिकों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी तरह की अफवाह पर विश्वास न करें और अगर कहीं कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है तो तुरंत प्रशासन को इसकी जानकारी दें। उन्होंने कहा कि अफवाहें अक्सर छोटी-छोटी बातों को बड़ा विवाद बना सकती हैं, इसलिए सभी लोग संयम और समझदारी से काम लें।

बैठक में परसा थाना अध्यक्ष ओमप्रकाश ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक नियमों की जानकारी देते हुए कहा कि मोहर्रम के दौरान ताजिया रखने और जुलूस निकालने के लिए प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना लाइसेंस किसी भी स्थान पर ताजिया स्थापित करना या जुलूस निकालना नियमों के विरुद्ध माना जाएगा।

थानाध्यक्ष ने कहा कि पर्व के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि निर्धारित मार्ग, समय और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें, ताकि किसी भी तरह की परेशानी उत्पन्न न हो।

प्रशासन ने बताया कि मोहर्रम के अवसर पर क्षेत्र के संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी जाएगी। पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ असामाजिक तत्वों पर भी नजर रखी जाएगी। सोशल मीडिया के माध्यम से फैलने वाली अफवाहों पर भी प्रशासन की विशेष निगाह रहेगी। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से कहा कि किसी भी भ्रामक संदेश को आगे बढ़ाने से बचें और किसी भी समस्या की स्थिति में तुरंत स्थानीय पुलिस से संपर्क करें।

बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने प्रशासन को हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया। लोगों ने कहा कि परसा क्षेत्र में हमेशा से सभी समुदायों के लोग मिल-जुलकर पर्व मनाते आए हैं और इस बार भी मोहर्रम को शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने में पूरा सहयोग किया जाएगा।

बैठक के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए समाज के हर वर्ग को जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के विवाद से दूर रहें और पर्व को भाईचारे के माहौल में मनाएं।

इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य विनोद राय, मुखिया प्रतिनिधि इंजीनियर आसिफ असलम, पूर्व प्राचार्य प्रो. विमल राय सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। इसके अलावा राजेंद्र राय, रघु राय, सैयद कमर अब्बास, सैयद शकील अब्बास, सैयद दिलबर अब्बास, अल्तमस अब्बास, इंतखाब मेहंदी, इरफान हुसैन, मकसूद आलम, राजू राय, आदम अली, सलामत हुसैन समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने बैठक में भाग लिया।

बैठक के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से मोहर्रम पर्व मनाने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने का संकल्प लिया। प्रशासन ने भी भरोसा दिलाया कि पर्व के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।

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मोहर्रम जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण पर्व को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन और समाज दोनों की संयुक्त भूमिका अहम होती है। परसा में आयोजित शांति समिति की बैठक इसी दिशा में एक सकारात्मक पहल है। बैठक में प्रशासन ने जहां सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी तैयारियों की जानकारी दी, वहीं स्थानीय लोगों से सहयोग की अपील भी की।

प्रशासन द्वारा ताजिया जुलूस के लिए लाइसेंस अनिवार्य करने का उद्देश्य व्यवस्था को बेहतर बनाना और किसी भी संभावित समस्या को पहले से रोकना है। पर्व के दौरान अनुशासन और आपसी समझ ही शांति व्यवस्था बनाए रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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